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कैमूर: बहुआरा में 4 साल से जलजमाव पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, मंत्री जमा खान का पुतला फूंका, खरीगावाँ-दुर्गावती मार्ग जाम।

September 12, 2026 | रिपोर्टर: परवेज़ खान
कैमूर (भभुआ) - बिहार के कैमूर जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां चांद प्रखंड अंतर्गत चौरी पंचायत के बहुआरा गांव में विकास के दावों की पोल खुलती नजर आई। पिछले चार वर्षों से गांव में व्याप्त भीषण जलजमाव की समस्या से आजिज आकर ग्रामीणों का गुस्सा शनिवार को सातवें आसमान पर पहुंच गया। जल निकासी और जर्जर रास्ते के निर्माण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों ने न केवल खरीगावाँ-दुर्गावती मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया, बल्कि जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
क्षेत्रीय विधायक सह मंत्री का फूंका पुतला:
ग्रामीणों का सबसे ज्यादा आक्रोश स्थानीय विधायक सह बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान के खिलाफ देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। गुस्से में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन 'मुर्दाबाद' के नारों के बीच मंत्री जमा खान का पुतला दहन किया।
4 साल से नारकीय जीवन जीने को विवश ग्रामीण:
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लगभग 300 मीटर क्षेत्र में लंबे समय से पानी जमा हुआ है। यह समस्या पिछले चार वर्षों से बनी हुई है। बरसात के दिनों में तो स्थिति भयावह हो जाती है, जिससे गांव टापू में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्हें हर रोज घर से निकलते ही घुटने भर गंदे और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाने में और मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी फजीहत झेलनी पड़ती है। गंदे पानी के कारण बीमारी फैलने का भी डर बना हुआ है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं, कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
आवागमन बाधित, उग्र आंदोलन की चेतावनी:
चक्का जाम होने के कारण खरीगावाँ-दुर्गावती मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा। राहगीरों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तत्काल स्थल का निरीक्षण कर जलनिकासी और पक्की सड़क निर्माण की व्यवस्था नहीं कराई गई, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की होगी।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद खुला जाम:
सड़क जाम और पुतला दहन की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। चांद प्रखंड के बीडीओ हादिब खान और थानाध्यक्ष हरि प्रसाद शर्मा दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यान से सुना और उन्हें समझाने-बुझाने का प्रयास किया।

मामले पर जानकारी देते हुए थानाध्यक्ष हरि प्रसाद शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की जायज मांग को देखते हुए जलजमाव वाले स्थान से पानी की तत्काल स्थायी निकासी की व्यवस्था कराई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जलनिकासी के तुरंत बाद सड़क पर कंक्रीट और मैटिरियल डालकर उसे ऊंचा किया जाएगा, ताकि जलजमाव की समस्या दोबारा न हो।
प्रशासन और पुलिस के ठोस आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण शांत हुए और सड़क से जाम हटाया, जिसके बाद आवागमन सुचारू रूप से बहाल हो सका।
बहुआरा में ग्रामीणों के इस उग्र विरोध प्रदर्शन ने क्षेत्र में विकास और बुनियादी सुविधाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से नारकीय जीवन जी रहे ग्रामीणों की जायज मांग पर अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन का "तत्काल" आश्वासन जमीनी हकीकत कब बनता है।