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कैमूर: कुदरा अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़, घूस के 500 रुपये 'Phone-Pe' होते ही 2 मिनट में बन गया काम

September 27, 2026 | रिपोर्टर: परवेज़ खान
कूदरा/कैमूर: कैमूर जिले के कुदरा अंचल कार्यालय से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां 'डिजिटल इंडिया' की तर्ज पर 'डिजिटल रिश्वतखोरी' का खेल चल रहा है। आरोप है कि भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में धारा 144 की कार्रवाई के कागजात आगे बढ़ाने के नाम पर राजस्व कर्मी और प्रधान लिपिक ने खुलेआम रिश्वत की मांग की। ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर होने के महज दो मिनट बाद ही काम पूरा कर दिया गया।
​क्या है पूरा मामला?
पीड़ित सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि उनकी विवादित जमीन को लेकर उन्होंने कैमूर जिलाधिकारी (DM) से गुहार लगाई थी। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुदरा अंचल कार्यालय को शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 की अनुशंसा करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।

​पहले नकद 500, फिर फोन-पे से भी लिए 500 रुपये
आरोप है कि डीएम के निर्देश के बावजूद कुदरा अंचल के राजस्व कर्मी ने जांच प्रतिवेदन आगे बढ़ाने के नाम पर पहले 500 रुपये नकद ऐंठे। इसके बाद फाइल जब प्रधान लिपिक बाढ़ु राम के पास पहुंची, तो उन्होंने भी रिश्वत की मांग कर दी। काम में हो रही देरी से परेशान होकर पीड़ित ने अपनी पत्नी के मोबाइल से 'फोन-पे' (PhonePe) के जरिए प्रधान लिपिक के नंबर पर 500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए।

पैसे मिलते ही 2 मिनट में व्हाट्सएप पर आ गए कागजात
रिश्वत का पैसा खाते में पहुंचते ही अंचल कार्यालय के काम की रफ्तार बुलेट ट्रेन जैसी हो गई। पीड़ित का दावा है कि पैसे ट्रांसफर होने के महज दो मिनट के भीतर ही धारा 144 की अनुशंसा के कागजात उन्हें व्हाट्सएप पर भेज दिए गए। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की रसीद और व्हाट्सएप चैट इस भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत बन गए हैं।
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दलालों के भरोसे चल रहा कार्यालय!
इस घटना के बाद कुदरा अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित सूर्यकांत त्रिपाठी के अलावा अन्य आवेदकों ने भी यह आरोप लगाया है कि अंचल कार्यालय में राजस्व कर्मियों ने अवैध वसूली के लिए अपने निजी सहयोगी (दलाल) रखे हुए हैं, जिनके बिना कोई भी सरकारी काम फाइल से बाहर नहीं निकलता।

एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने और सुबूत सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप है। मोहनियां अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) रत्ना प्रियदर्शनी ने इस गंभीर आरोप पर संज्ञान लिया है। एसडीएम ने कहा कि प्रधान लिपिक के खिलाफ मिली इस शिकायत की गहनता से जांच की जा रही है। अगर जांच में आरोप सही पाए गए और दोषी सिद्ध हुए, तो संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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