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कैमूर: नीलाम पत्र वादों में फंसे 501 करोड़ रुपये, वसूली के लिए डीएम सख्त, कुर्की-जब्ती और 5000 से अधिक गिरफ्तारी वारंट तामिला का निर्देश।

September 11, 2026 | रिपोर्टर: परवेज़ खान
भभुआ/कैमूर (11 सितंबर 2026):
जिले में सरकारी राजस्व और बैंकों के बड़े बकायेदारों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने वाला है। शुक्रवार को समाहरणालय स्थित मां मुंडेश्वरी सभागार में कैमूर के जिला पदाधिकारी (डीएम) की अध्यक्षता में नीलाम पत्र वादों (Certificate Cases) की प्रगति और लंबित मामलों की एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वसूली की धीमी गति पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को बकायेदारों के खिलाफ कुर्की-जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाई में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
501 करोड़ से अधिक की राशि फंसी, वसूली की रफ्तार सुस्त।
समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि जिले के विभिन्न नीलाम पत्र न्यायालयों में कुल 17,867 मामले दर्ज हैं, जिनमें करीब ₹501.80 करोड़ की भारी-भरकम राशि फंसी हुई है। इसके एवज में अब तक केवल 380 मामलों का ही निपटारा हो सका है, जिससे महज ₹9.19 करोड़ की वसूली हुई है (इसमें अगस्त माह में निपटाए गए 40 मामलों से प्राप्त ₹1.06 करोड़ शामिल हैं)। डीएम ने इस धीमी प्रगति पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों को हर महीने वसूली का स्पष्ट लक्ष्य (Target) निर्धारित करने और वादों का तेजी से निपटारा करने का निर्देश दिया।
बैंकों के सबसे ज्यादा मामले, टॉप 10 बकायेदारों पर विशेष नजर
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 14,312 मामले विभिन्न बैंकों से जुड़े हैं, जिनमें लगभग ₹222.37 करोड़ बकाया हैं। डीएम ने बैंक प्रतिनिधियों और नीलाम पत्र पदाधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर वसूली में तेजी लाने को कहा है।
इसके साथ ही, जिले के 10 सबसे बड़े बकायेदारों के मामलों की अलग से समीक्षा की गई। डीएम ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि:

धारा-7 के तहत जारी नोटिसों की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए।

जिन मामलों में आपत्तियां खारिज हो चुकी हैं या वारंट जारी हो चुके हैं, उनके बैंक खातों और संपत्तियों की कुर्की-जब्ती की जाए।

गिरफ्तारी की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई कोताही न बरती जाए।

5 हजार से ज्यादा गिरफ्तारी वारंट थानों में लंबित
समीक्षा में पाया गया कि जिले के विभिन्न थानों में बकायेदारों के खिलाफ कुल 5,082 बॉडी वारंट (गिरफ्तारी वारंट) और 180 डिस्ट्रेस वारंट पेंडिंग हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला पदाधिकारी ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) और थानाध्यक्षों के साथ समन्वय स्थापित कर इन वारंटों का शत-प्रतिशत तामिला (Execution) सुनिश्चित कराने का कड़ा निर्देश दिया है।

पारदर्शिता के लिए प्रपत्र 9 और 10 के मिलान का आदेश
आंकड़ों की विसंगति दूर करने और सटीक रिकॉर्ड के लिए डीएम ने नीलाम पत्र शाखा और संबंधित अधियाचक विभागों/बैंकों द्वारा जारी प्रपत्र 9 और प्रपत्र 10 का शत-प्रतिशत मिलान (Reconciliation) सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इससे वास्तविक बकाया राशि और वादों की अद्यतन स्थिति का सही रिकॉर्ड मेंटेन हो सकेगा।
वित्तीय वर्ष के अंत तक अधिकतम वसूली का लक्ष्य
प्रशासन का मुख्य लक्ष्य लंबित मामलों को कम करना और सरकारी राजस्व की समयबद्ध वसूली करना है। जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने न्यायालयों में वादों की नियमित सुनवाई करने को कहा है, ताकि वित्तीय वर्ष के अंत तक ज्यादा से ज्यादा वसूली की जा सके। इसके लिए अंचलाधिकारियों, बैंक प्रबंधकों और अनुमंडल पदाधिकारियों को आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करने की हिदायत दी गई है।
बैठक में अपर समाहर्ता, भभुआ एवं मोहनियां के अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी, सभी अंचलाधिकारी (CO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और विभिन्न बैंकों व विभागों के नोडल पदाधिकारी उपस्थित रहे।