मोहनियां बीआरजीएफ भवन में बीस सूत्री की बैठक में जमकर हंगामा, आवास योजना में घूसखोरी और मनरेगा फर्जीवाड़े पर फूटा गुस्सा
September 15, 2026
| रिपोर्टर: परवेज़ खान
कैमूर/मोहनियां:
मोहनियां प्रखंड मुख्यालय स्थित बीआरजीएफ भवन में सोमवार को आयोजित प्रखंड स्तरीय बीस सूत्री कार्यान्वयन समिति की बैठक काफी हंगामेदार रही। बैठक में एक तरफ जहां कई महत्वपूर्ण विभागों के पदाधिकारियों और कर्मियों की गैरहाजिरी पर सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताया, वहीं दूसरी तरफ प्रखंड में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं में व्याप्त अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। सदस्यों के तीखे सवालों के सामने मौजूद अधिकारी बगलें झांकते नजर आए।
बैठक के दौरान बीस सूत्री सदस्यों ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के सर्वे में चल रही मनमानी का पर्दाफाश किया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि आवास सहायकों द्वारा पात्र लाभुकों से सूची में नाम जोड़ने और जियो-टैगिंग के नाम पर खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं। सदस्यों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस संबंध में पूर्व में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को साक्ष्य के साथ लिखित शिकायत सौंपी गई थी, लेकिन अब तक दोषी कर्मियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। सदस्यों का यह भी आरोप है कि आवास सहायक लाभुकों को यह कहकर धमकाते हैं कि शिकायत करने से उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा।
मनरेगा में फर्जी फोटो और कमीशनखोरी का सिंडिकेट
बैठक में मनरेगा योजना की जमीनी हकीकत भी सामने आई। सदस्यों ने खुलासा किया कि प्रखंड में बिना धरातल पर काम कराए केवल मजदूरों को खड़ा कर उनकी तस्वीरें खींच ली जाती हैं और मास्टर रोल में उपस्थिति दर्ज कर मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। इसके बाद मिलीभगत से राशि की निकासी कराकर बिचौलियों और जिम्मेदार कर्मियों के बीच तय कमीशन बांट लिया जाता है। सदस्यों ने इस पूरे खेल की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराकर सरकारी राशि की रिकवरी कराने की मांग की।
शोभा की वस्तु बनी 'हर घर नल-जल' योजना: अध्यक्ष नंदन राय
बीस सूत्री अध्यक्ष नंदन राय ने बैठक को संबोधित करते हुए विभिन्न विभागों की कार्यशैली पर गहरा असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि पिछली बैठक की कार्यवाही रिपोर्ट (एटीआर) पर कोई ठोस अमल नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट है कि अधिकारी जनता की समस्याओं को लेकर उदासीन हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना की समीक्षा करते हुए कहा:
"प्रखंड की कई पंचायतों में योजनाएं आधी-अधूरी पड़ी हैं। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां पानी की आपूर्ति ठप है। आज स्थिति यह है कि सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना अधिकांश वार्डों में महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है।"
सवालों के जवाब दिए बिना निकले बीडीओ
बैठक खत्म होने के बाद जब मीडियाकर्मियों ने बैठक में उठे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों, आवास सहायकों की मनमानी और अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) महेंद्र कुमार सिंह से पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और बिना कोई जवाब दिए सीधे अपने कक्ष में चले गए।
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